पुरुरवा से लेकर भगवान महावीर के ३४ भव
#1

पुरुरवा से लेकर भगवान महावीर के ३४ भव
. पुरुरवा भील                         १६. स्थावरब्राह्मण
. प्रथम स्वर्ग में देव                 १७. चतुर्थ स्वर्ग में देव
 . भरत पुत्रमरीचि             १८. विश्वनंदि
. ब्रह्म स्वर्ग में देव                  १९. महाशुक्र नामक दशवें स्वर्ग में देव
 . जटिल ब्राह्मण                 २०. त्रिपृष्ठ अर्धचक्री
  .सौधर्म स्वर्ग में देव           २१. सप्तम नरक में
. पुष्यमित्रब्राह्मण             २३. सिंह
. सौधर्म स्वर्ग में देव             २४. सिंह (यहाँ से उत्थान प्रारम्भ)
. अग्नि समब्राह्मण                 २५. सौधर्मस्वर्ग में सिहकेतु नामक देव
१०. सनत्कुमार स्वर्ग में देव       २६. कनकोज्जवल विद्याधर
 ११. अग्निमित्र ब्राह्मण             २७. सातवें स्वर्ग में देव
१२. भारद्वाज                        २८. हरिषेण राजा
 १३. माहेन्द्र स्वर्ग में देव         २९. महाशुक्र स्वर्ग में देव
१५. मनुष्य                          ३०. प्रियमित्र नामक चक्रवर्ती (इसके बाद एवेंद्रिय आदि ३१. सहास्रार स्वर्म में सूर्यप्रभदेव असंख्यात भव) ३२. नंदन नामक राजा ३३. अच्युत स्वर्ग के पुष्पोत्तर विमान में इन्द्र ३४. तीर्थंकरवर्धमानमहावीर इस प्रकार पुरुरवा भील से लेकर महावीर पर्यंत ३४ भवों को दिखाया है। इनके मध्य असंख्यातों वर्षों तक नरको में, त्रसस्थावर योनियों में तथा इतर निगोद में जो भव ग्रहण किये हैं उनकी गिनती नहीं हो सकती है।
Reply


Forum Jump:


Users browsing this thread: 1 Guest(s)