दर्शन स्तुति का अर्थ - Printable Version
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दर्शन स्तुति का अर्थ -
FDArchitects - 02-23-2026
दर्शन स्तुति का अर्थ
देवाधिदेव जिनदेव प्रभु के दर्शन करने से समस्थ पापो का नाश होता हैस्वर्ग के सुखो की प्राप्ति होती हैएवम् यह मोक्ष का दाता है
जिनेन्द्र देव प्रभु का दर्शन एवम्धू को वन्दन करने से सभी चिसंचित पाप वैसे ही नष्ट हो जाते है जैसे छिद्र युक्त हाथो के बीच से जल
वीतरागी प्रभु के कमल के समान खिले हुवे सुंदर मुखमण्डल को देखने से उसका दर्शन करने से जन्म जन्म के पापो का नाश हो जाता है
बस एक बार वीतराग मुद्रा को निहार लेने से जिनदेव प्रभु सूर्य के उदित होने से सारे जग का अज्ञान रूपी अंधकार दूर हो जाता है और हार्दिक कमल पुष्प खिल उठते है सब और ज्ञान का उजाला फैल जाता है
जिनदेव प्रभु के दर्शन चंद्रमा के समान धर्म रूपी अमृत को बरसने वाले है और जन्म जन्म के दुःखो का नाश करके सुख की बरसात करने वाले है
जीवादि तत्त्वों को बतलाने वाले सम्यक्त्व रूपी अष्ट गुणों को बतलाने वाले सागर रूपी दिगम्बर रूप को धरने वाले जिनदेव प्रभु को नमन है
चिरकाल तक आनंद से भर देने वाला जिनदेव परमात्मा तुम्हारा ये चिदानंद रूप आत्मा को प्रकाशित करने वाला है
सदा हमारा नमस्कार है
अन्य शरण कप छोड़ कर मैंने केवल तुम्हारी शरणली है क्योकि एक आप ही हो जो करुण्य भाव रखते है और हे जिनदेव सदा हमारी रक्षा करना
कही नही कही नही कही नही पुरे जगत में कही नही
वीतराग प्रभु से बड़कर कोई ना वर्तमान में ना भविष्य में और ना भुत काल ना कोई है ना कभी कोई हुवा है ना कभी होगा ।