08-19-2026, 04:03 AM
जैन भूगोल में सबसे छोटे अणु को परमाणु कहते हैं ।
ऐसे अनन्तानन्त परमाणु = १ अवसन्नासन्न *
८ अवसन्नासन्न = १ सन्नासन्न *
८ सन्नासन्न = १ त्रुटिरेणु *
८ त्रुटिरेणु का = त्रसरेणु *
८ त्रसरेणु का = रथरेणु *
८ रथरेणु = उत्तम भोग भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
उत्तम भोग भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = मध्यम भोग भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
मध्यम भोग भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = जघन्य भोग भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
जघन्य भोग भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = कर्म भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
कर्म भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = १ लिक्शा *
८ लिक्शा = १ जू *
८ जू = १ जौ *
८ जौ = १ अंगुल या उत्सेधांगुल (५०० उत्सेधांगुल = १ प्रमाणांगुल) *
६ उत्सेधांगुल = १ पाद *
२ पाद = १ बालिस्त *
२ बालिस्त = १ हाथ *
२ हाथ = १ रिक्कु *
२ रिक्कु = १ धनुष्य *
२००० धनुष्य = १ कोस *
४ कोस = १ लघुयोजन *
५०० लघुयोजन = १ महायोजन *
असंख्यात योजन = १ राजु
१ योजन (१२ से १३ कि॰मी॰)विस्तार के गोल गढ्ढे का घनफल १९/२४ योजन प्रमाण होता है। * ऐसे गढ्ढे मे मेंढो के रोम के छोटे छोटे टुकडे करके (जिसके पुनः दो टुकडे न हो सके)खचाखच भर दे। * इन रोमों का प्रमाण ४१३४५२६३०३०८२०३१७७७४९५१२१९२०००००००००००००००००० होता है। * अब इन रोमो मे से, सौ सौ वर्ष मे एक एक रोम खंड के निकालने पर जितने समय मे वह गड्डा खाली हो जाये, उतने काल को १ व्यवहार पल्य कहते है।
ऐसे अनन्तानन्त परमाणु = १ अवसन्नासन्न *
८ अवसन्नासन्न = १ सन्नासन्न *
८ सन्नासन्न = १ त्रुटिरेणु *
८ त्रुटिरेणु का = त्रसरेणु *
८ त्रसरेणु का = रथरेणु *
८ रथरेणु = उत्तम भोग भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
उत्तम भोग भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = मध्यम भोग भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
मध्यम भोग भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = जघन्य भोग भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
जघन्य भोग भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = कर्म भूमिज के बाल का १ अग्रभाग *
कर्म भूमिज के बाल के ८ अग्रभाग = १ लिक्शा *
८ लिक्शा = १ जू *
८ जू = १ जौ *
८ जौ = १ अंगुल या उत्सेधांगुल (५०० उत्सेधांगुल = १ प्रमाणांगुल) *
६ उत्सेधांगुल = १ पाद *
२ पाद = १ बालिस्त *
२ बालिस्त = १ हाथ *
२ हाथ = १ रिक्कु *
२ रिक्कु = १ धनुष्य *
२००० धनुष्य = १ कोस *
४ कोस = १ लघुयोजन *
५०० लघुयोजन = १ महायोजन *
असंख्यात योजन = १ राजु
१ योजन (१२ से १३ कि॰मी॰)विस्तार के गोल गढ्ढे का घनफल १९/२४ योजन प्रमाण होता है। * ऐसे गढ्ढे मे मेंढो के रोम के छोटे छोटे टुकडे करके (जिसके पुनः दो टुकडे न हो सके)खचाखच भर दे। * इन रोमों का प्रमाण ४१३४५२६३०३०८२०३१७७७४९५१२१९२०००००००००००००००००० होता है। * अब इन रोमो मे से, सौ सौ वर्ष मे एक एक रोम खंड के निकालने पर जितने समय मे वह गड्डा खाली हो जाये, उतने काल को १ व्यवहार पल्य कहते है।

