10-05-2026, 03:09 AM
ॐ नमः सिद्धेभ्यः। श्री वीतरागाय नमः`
भावार्थ- सभी सिद्ध भगवान को नमस्कार। जो राग-द्वेष से दूर हो चुके हैं उन वीतराग भगवान को नमस्कार।
ॐ नमो अर्हते भगवते, श्रीमते पार्श्वतीर्थंकराय...`
भावार्थ- भगवान पार्श्वनाथ को नमस्कार जो बारह सभाओं से घिरे हैं, शुक्ल ध्यान से पवित्र हैं, सब कुछ जानने वाले हैं, स्वयं प्रकट हुए हैं, बुद्ध हैं, परमात्मा हैं, तीनों लोक में महिमा वाले हैं।
• "छिंद - छिंद भिंद - भिंद" का मतलब क्या है?
ये सबसे अहम हिस्सा है। यहां भगवान से प्रार्थना है कि हमारे सभी दुख काट दो, तोड़ दो, नष्ट कर दो।
मृत्यु छिंद- मौत का डर खत्म कर दो
अतिकामं छिंद- हद से ज्यादा वासना नष्ट कर दो।
रतिकामं छिंद- गलत इच्छाएं खत्म कर दो।
क्रोध छिंद- गुस्सा नष्ट कर दो
अग्निभयं छिंद- आग का डर खत्म करो।
सर्वशत्रु भयं छिंद- सभी दुश्मनों का डर खत्म करो।
सर्वोपसर्गं छिंद- सभी उपद्रव/संकट खत्म करो।
सर्वविघ्नं छिंद- सारे काम में रुकावटें खत्म करो।
सर्वभयं छिंद- हर तरह का डर खत्म करो।
सर्वराजभयं छिंद- राजा/सरकार का डर खत्म करो।
सर्वचौरभयं छिंद- चोर का डर खत्म करो।
सर्वदुष्टभयं छिंद- दुष्ट लोगों का डर खत्म करो।
रोग विनाश हेतु..
सर्वशूलरोगं छिंद- पेट दर्द, सिर दर्द जैसे सभी दर्द खत्म करो।
सर्वक्षयरोगं छिंद- टीबी जैसे रोग खत्म करो।
सर्वकुष्ठरोगं छिंद- कुष्ठ रोग खत्म करो
महामारी विनाश मे..
सर्वजन्मारीं छिंद- महामारी खत्म करो
सर्वराष्ट्रमारीं छिंद- देश में फैली बीमारी खत्म करो।
सर्ववेतालशाकिनीभयं छिंद- भूत-प्रेत का डर खत्म करो।
सुदर्शन चक्र से लाभ
ॐ सुदर्शन महाराज चक्रविक्रम... शांति कुरुकुरु
भावार्थ- हे सुदर्शन चक्र, अपनी ताकत से सबके लिए शांति करो। सभी लोगों को, बच्चों को, गायों को, गांव-शहर को, देश को आनंद दो। सभी दुखों को हन हन, दह दह, पच पच यानी जला दो, खत्म कर दो।
समापन में मंगल भावना..
यत्सुखं त्रिषु लोकेषु व्याधि-व्यसन वर्जितं
आशय- तीनों लोक में जो भी सुख है वो बिना बीमारी और बिना बुरे कामों के सबको मिले। सबको निर्भयता, शांति, सेहत मिले।
शिवमस्तु सदास्तु। शांतिरस्तु सदास्तु`
भाव- सबका कल्याण हो, हमेशा शांति रहे। परिवार, धन, धान्य हमेशा बना रहे।
पद्मप्रभु चन्द्रप्रभु... इत्येभ्यो नमः`
भाव- तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु से लेकर पार्श्वनाथ तक, सभी को नमस्कार।
फिर अन्त मे
देशस्य राष्ट्रस्य पुरस्य राज्ञः, करोतु शांति भगवान् जिनेन्द्रः`
भावार्थ- भगवान जिनेन्द्र देश में, राज्य में, शहर में, राजा के लिए शांति करें।
सर्व पाप प्रणाशनाय... सर्व शांतिं कुरु-कुरु
अर्थ- सभी पाप, विघ्न, रोग, मृत्यु को नष्ट करने के लिए, हे भगवान सब जगह शांति कर दो।
भावार्थ- सभी सिद्ध भगवान को नमस्कार। जो राग-द्वेष से दूर हो चुके हैं उन वीतराग भगवान को नमस्कार।
ॐ नमो अर्हते भगवते, श्रीमते पार्श्वतीर्थंकराय...`
भावार्थ- भगवान पार्श्वनाथ को नमस्कार जो बारह सभाओं से घिरे हैं, शुक्ल ध्यान से पवित्र हैं, सब कुछ जानने वाले हैं, स्वयं प्रकट हुए हैं, बुद्ध हैं, परमात्मा हैं, तीनों लोक में महिमा वाले हैं।
• "छिंद - छिंद भिंद - भिंद" का मतलब क्या है?
ये सबसे अहम हिस्सा है। यहां भगवान से प्रार्थना है कि हमारे सभी दुख काट दो, तोड़ दो, नष्ट कर दो।
मृत्यु छिंद- मौत का डर खत्म कर दो
अतिकामं छिंद- हद से ज्यादा वासना नष्ट कर दो।
रतिकामं छिंद- गलत इच्छाएं खत्म कर दो।
क्रोध छिंद- गुस्सा नष्ट कर दो
अग्निभयं छिंद- आग का डर खत्म करो।
सर्वशत्रु भयं छिंद- सभी दुश्मनों का डर खत्म करो।
सर्वोपसर्गं छिंद- सभी उपद्रव/संकट खत्म करो।
सर्वविघ्नं छिंद- सारे काम में रुकावटें खत्म करो।
सर्वभयं छिंद- हर तरह का डर खत्म करो।
सर्वराजभयं छिंद- राजा/सरकार का डर खत्म करो।
सर्वचौरभयं छिंद- चोर का डर खत्म करो।
सर्वदुष्टभयं छिंद- दुष्ट लोगों का डर खत्म करो।
रोग विनाश हेतु..
सर्वशूलरोगं छिंद- पेट दर्द, सिर दर्द जैसे सभी दर्द खत्म करो।
सर्वक्षयरोगं छिंद- टीबी जैसे रोग खत्म करो।
सर्वकुष्ठरोगं छिंद- कुष्ठ रोग खत्म करो
महामारी विनाश मे..
सर्वजन्मारीं छिंद- महामारी खत्म करो
सर्वराष्ट्रमारीं छिंद- देश में फैली बीमारी खत्म करो।
सर्ववेतालशाकिनीभयं छिंद- भूत-प्रेत का डर खत्म करो।
सुदर्शन चक्र से लाभ
ॐ सुदर्शन महाराज चक्रविक्रम... शांति कुरुकुरु
भावार्थ- हे सुदर्शन चक्र, अपनी ताकत से सबके लिए शांति करो। सभी लोगों को, बच्चों को, गायों को, गांव-शहर को, देश को आनंद दो। सभी दुखों को हन हन, दह दह, पच पच यानी जला दो, खत्म कर दो।
समापन में मंगल भावना..
यत्सुखं त्रिषु लोकेषु व्याधि-व्यसन वर्जितं
आशय- तीनों लोक में जो भी सुख है वो बिना बीमारी और बिना बुरे कामों के सबको मिले। सबको निर्भयता, शांति, सेहत मिले।
शिवमस्तु सदास्तु। शांतिरस्तु सदास्तु`
भाव- सबका कल्याण हो, हमेशा शांति रहे। परिवार, धन, धान्य हमेशा बना रहे।
पद्मप्रभु चन्द्रप्रभु... इत्येभ्यो नमः`
भाव- तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु से लेकर पार्श्वनाथ तक, सभी को नमस्कार।
फिर अन्त मे
देशस्य राष्ट्रस्य पुरस्य राज्ञः, करोतु शांति भगवान् जिनेन्द्रः`
भावार्थ- भगवान जिनेन्द्र देश में, राज्य में, शहर में, राजा के लिए शांति करें।
सर्व पाप प्रणाशनाय... सर्व शांतिं कुरु-कुरु
अर्थ- सभी पाप, विघ्न, रोग, मृत्यु को नष्ट करने के लिए, हे भगवान सब जगह शांति कर दो।

