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षटखण्डागम और द्वादशांग जिनवाणी में क्या अन्तर है- - Printable Version

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षटखण्डागम और द्वादशांग जिनवाणी में क्या अन्तर है- - FDArchitects - 06-19-2026

षटखण्डागम और द्वादशांग जिनवाणी में मुख्य अंतर व्यापकता (Scope), रचनाकाल और स्वरूप का है। जैन दर्शन में इन दोनों का बहुत ही पूज्य और महत्वपूर्ण स्थान है।
संक्षेप में समझें तो द्वादशांग संपूर्ण मूल ज्ञान का सागर है, और षटखण्डागम उसी सागर से निकला हुआ पहला प्रामाणिक ग्रंथ रूपी घट (घड़ा) है।
दोनों के बीच के मुख्य अंतर को हम कुछ बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं:
1. परिभाषा और स्वरूप 2. रचना और काल (Origin & Timeline) 3. विषय-वस्तु (Content)
Quote:एक सरल उदाहरण से समझें:
द्वादशांग वह विशाल हिमालय है जिससे ज्ञान की नदियां निकलती हैं, और षटखण्डागम उस हिमालय से निकली वह पहली मुख्य नदी (धारा) है जिसे आचार्यों ने ग्रंथों के पन्नों पर उतारकर हम तक सुरक्षित पहुंचाया।
यही कारण है कि जब षटखण्डागम ग्रंथ लिखकर पूरा हुआ था, तब ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन उसकी पहली बार पूजा की गई थी, जिसे आज भी पूरा जैन समाज 'श्रुतपंचमी' के रूप में मनाता है।